भारतीय शहरों में महिलाएँ एक आवागमन संकट का सामना करती हैं, जिसकी जड़ सार्वजनिक जीवन में उनकी आवाजाही पर पितृसत्तात्मक नियंत्रण में है। अध्ययनों के अनुसार शहरी भारत में महिलाओं की गतिशीलता दर महज़ 47% तक है, और लगभग आधी शहरी महिलाओं को अकेले बाहर निकलने की "अनुमति" नहीं होती। ट्रांसजेंडर व्यक्ति और अन्य लैंगिक अल्पसंख्यक सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन तक पहुँच की कमी बताते हैं। बस का डिज़ाइन, स्टॉप का स्थान, सेवाओं का समय, रोशनी और शौचालय का होना या न होना, और स्टाफ़ व सहयात्रियों का व्यवहार — ये सब तय करते हैं कि महिलाएँ स्वतंत्र, सुरक्षित और सम्मान के साथ चल पाती हैं या नहीं। किराया एक बड़ी बाधा है, पर हम लैंगिक पहुँच के पूरे दायरे पर काम करते हैं ताकि सार्वजनिक परिवहन महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए सचमुच समावेशी बन सके।
यह पृष्ठ इस विषय पर हमारे शोध, वक्तव्य, मीडिया और हाल के समाचार एक साथ लाता है: लैंगिक पहुँच और सुरक्षा।
शोध और रिपोर्ट
- Riding the Justice Routeरिपोर्ट · 2024
- Halt for Women Bus Usersरिपोर्ट · 2023
- Journey to Campus: Mobility and Inequality in Delhi Universityरिपोर्ट · 2026
- Fare-Free Future: Women's Perspectives in Mumbaiरिपोर्ट · 2024
वक्तव्य और पत्र
सभी वक्तव्य और पत्र →मीडिया और कवरेज
- Buses are Free for Women in Delhi (video)Greenpeace International
- Fighting Gender Inequality Through MobilityIdeas for India · 2025
- Saheli Smart Card roll-out raises concerns of digital exclusionThe Patriot · 2025
- 'A long wait, humiliation': poor transport keeps cities unequalNewslaundry · 2025
समाचार और घटनाक्रम
- Kerala HC upholds free travel for women and transgender personsThe Hindu · 2026
- Excluded by address: migrant women, transgender persons decry Saheli CardsThe Hindu · 2025
- Beyond bus fare subsidy: women's access to gender-responsive mobilityIndiaSpend · 2025
- Why giving women free bus rides riles up the patriarchyThe Quint · 2025
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